सुहागिनों को अखंड सौभाग्य देने वाला होगा करवाचौथ आइए जानें आचार्य गोपाल दास स्वामी से

बदायूं

सुहागिनों को करवाचौथ के त्योहार का बेसब्री से इंतजार है। करवाचौथ का व्रत कल यानी कि 24 अक्टूबर को है। महिलाएं जब करवाचौथ की पूजा करके अपना व्रत खोलेंगी, तब रोहिणी नक्षत्र होगा। यह शुभ योग पांच साल बाद बन रहा है। यह संयोग व्रत रखने वाली सुहागिनों को अखंड सौभाग्यवती बनाएगा। करवाचौथ का दिन रविवार को पड़ने से सुहागिनों को सूर्य देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा।

करवाचौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। उसके बाद चांद निकलने पर छलनी में पति के दर्शन करके व्रत खोलने की परंपरा है। चूंकि करवाचौथ में 24 घंटे का ही वक्त बचा है

| करवा चौथ को पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखने की है परंपरा

व्रत की पूजा रोहिणी नक्षत्र में की जाएगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र पड़ने का शुभ योग पांच साल बाद बन रहा है। इस दिन रविवार होने से सुहागिनों को सूर्यदेव का खास आशीर्वाद प्राप्त होगा। इस बार का करवाचौथ सुहागिनों को अखंड सौभाग्य देने वाला होगा। कैसे करें पूजन

सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के पश्चात मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। फिर व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन निर्जला उपवास करें।

शुभ मुहूर्त में देवी-देवताओं की तस्वीर स्थापित करें। उसके बाद पूजन और कथा पढ़ें। चंद्रमा

मां पार्वती – भगवान शिव की पूजा

करवाचौथ के दिन मां पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की विधि विधान से पूजा होती है। सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं। फिर सूर्योदय से चंद्रोदय तक पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलती हैं। करवाचौथ की पूजा करने के बाद पति के हाथों से ही जल ग्रहण करने की परंपरा है।

निकलने से पहले ही एक थाली में धूप-दीप, रोली, पुष्प, फल, मिष्ठान आदि रख लें। टोंटी वाले लोटे में अर्घ्य देने के लिए जल भर लें।

फिर मिट्टी के करवा में चावल भरकर उसमें दक्षिणा के रूप में

तो बाजारों में भी इस त्योहार की रौनक दिखने लगी है। दुकानों में करवाचौथ की कथा की पुस्तक, चलनी, करवा, सींक और महिलाओं के श्रृंगार के सामान भी दिखने लगे हैं क्योंकि इस दिन सुहागिन महिलाएं नई-नवेली दुल्हन की तरह श्रृंगार करके पति की दीघार्यु की कामना करती हैं।

ज्योतिषाचार्य आचार्य गोपाल दास स्वामी का कहना है कि इस बार सुहागिनों के लिए करवाचौथ का व्रत खास होगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य आचार्य गोपाल दास स्वामी के मुताबिक 24 अक्टूबर यानी कि रविवार के दिन करवाचौथ है। चतुर्थी तिथि का आरंभ 24 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 1 मिनट, समापन अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 43 मिनट पर होगा। चांद निकलने का समय देर शाम 8 बजकर 11 मिनट पर है। इसलिए करवाचौथ के पूजन का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर को शाम 06:55 बजे से लेकर 08:51 बजे तक रहेगा।

कुछ पैसे रख दें। एक थाली में श्रृंगार का सामान रख लें। चंद्रमा निकलने के बाद दर्शन और पूजन करें। फिर चंद्रमा को अर्घ्य दें। उसके बाद जल पीकर व्रत का पारायण करें। तत्पश्चात घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।

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